Author Archives: Hariray Goswami

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About Hariray Goswami

I am the 17th descendent of SHRI MAHAPRABHUJI who is the founder of "SHUDDHADVAIT PUSHTIBHAKTI MARG..

PUSHTI RASANAND MAHOTASAV

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मंगल बधाई..”पुष्टि रसानंद महोत्सव”

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आत्मीय वैष्णवजन………………..
अत्यन्त प्रसन्नता का विषय हे की वैष्णवीनगरी सूरत में ”श्री पुष्टिघाम हवेली” के मंगल पाटोत्सव के उपलक्ष में ”पुष्टि रसानंद महोत्सव” का अद्वितीय आयोजन दि. ११/१२/२०१० से १८/१२/२०१० तक होंने जा रहा है ! तो आप सभी आत्मीय स्नेहीजन सस्नेह आमंत्रित है !
शुभम-
गो.हरिराय………..

अधिकतर जानकारी हेतु visit-www.pushtiyuvamanch.org/

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सत्संग,

स्वाध्याय में प्रमाद ना करो । नित्य स्वाध्याय करो । अच्छी पुस्तकों का पठन करो । यही सच्चे मित्र हैं ।

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सत्संग,

भगवान की शरण में जानेका अर्थ है भगवान की आज्ञा में रहना, उन्हीं के आदेशों के अनुसार जीना । भक्ति मार्ग के अनुरूप यही सरल उपाय है । भक्ति में आसक्ति तो है, लेकिन प्रभु में । भगवान में हुई आसक्ति का नाम है तीव्र भक्ति । इसी तीव्र भक्ति के चलते संसार की आसक्ति छूट जाती है जो दुःख का कारण है ।

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