Author Archives: Hariray Goswami

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About Hariray Goswami

I am the 17th descendent of SHRI MAHAPRABHUJI who is the founder of "SHUDDHADVAIT PUSHTIBHAKTI MARG..

॥ भक्त चरित्र ॥

॥ भक्त चरित्र ॥ इस असार संसारमेँ भगवान् के भक्तोँका चरित्र ही सार है।भक्त ही मानव-जातिके प्राण है,भक्त ही संसाररूपी वृक्षके अमृत फल है,भक्त ही सभ्य समाजको प्रकाश देनेवाले प्रदीप हैँ।भक्तोँके चरित्र सदा ही नवीन,मंगलमय तथा मानव-जीवनमेँ सात्त्विक भावोँका संचार करनेवाले हैँ।आदर्श व्यवहार,इन्द्रिय, मनपर विजय,पवित्र सेवाभाव,त्याग,भगव भ्दक्ति,प्रेम आदिके सच्चे स्वरूपका दर्शन भक्तोँके चरित्र और पारमार्थिक उपदेश हैँ। भक्त चरित्रोँको पढनेसे भगवान् के प्रति सच्ची श्रध्दा और भक्ति सहज ही प्राप्त हो जाती है।वास्तवमेँ भक्ति,भक्त भगवान् और गुरुके केवल नाम अलग-अलग हैँ,ये सब एक ही रूप हैँ।{विराम}

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પરિવાર…….!

પરિવાર…….!
 
જ્યાં બંધારણ ના હોય પણ વ્યવસ્થા હોય……!
જ્યાં સુચના ના હોય પણ સમજણ હોય……..!
જ્યાં કાયદો ના હોય પણ અનુશાસન હોય……!
જ્યાં ભય ના હોય પણ ભરોસો હોય……..!
જ્યાં શોષણ ના હોય પણ પોષણ હોય……!
જ્યાં આગ્રહ ના હોય પણ આદર હોય……!
જ્યાં સંપર્ક નહિં પણ સંબંધ હોય…….!
જ્યાં અર્પણ નહિં પણ સમપર્ણ હોય…….!
 
એજ સાચો પરિવાર……..!

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“संकल्प और समर्पण”

संकल्प और समर्पण। अगर अर्थ की दृष्टि से देखा जाए, तो दोनों ही  हैं। या तो आप संकल्प कर सकते हैं, या फिर समर्पण। जैसे युद्ध में सामने वाले ने हथियार छोड दिए, तो समझो कि समर्पण हो गया। जब तक लड रहे थे, तो संकल्प से लड रहे थे। लेकिन जब संकल्प हारा, तो समर्पण किया। लेकिन अध्यात्म में संकल्प और समर्पण साथ-साथ चलते हैं। संकल्प करें और प्रभु के अनुग्रह से वह संकल्प पुरे होंगे, संकल्प की शक्ति का बीज सब में होता है, लेकिन अगर आप बीज को मिट्टी में न डालो, उसको खाद, पानी न दो, तो वह फूटेगा ही नहीं। बडे-बडे संकल्प मत करो, छोटे-छोटे संकल्प लो। जैसे एक प्रेमी और प्रेमिका एक बगीचे में बैठे थे। प्रेमिका ने प्रेमी से कहा तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो? प्रेमी बोला, तुम्ही बताओ, चांद लाऊं, तारे लाऊं। तो प्रेमिका बोली, इतनी बडी बात मत करो, तुम इतना ही बोल दो कि गोभी का फूल लाऊंगा, तू रोटी पकाएगी, मैं खाऊंगा। व्यावहारिक बात करो।
छोटे-छोटे कदम उठाओ, तो हजारों मील की यात्रा पूरी हो जाती है। यह मत कहो कि हजारों मील चलना है, पर मुझ में शक्ति नहीं।  हजारों मील नहीं, तो एक कदम तो चल सकते हे। एक-एक कदम ही चलो। संकल्प की शक्ति का विकास करने के लिए छोटे-छोटे प्रयोग करें, जैसे हम अन्न (व्रत) नहीं खाएंगे। 24घंटे तो बहुत लंबा है, तुम छोटा समय लो। घडी देखो और संकल्प करो कि अगले आधे घंटे तक मैं मौन रहूंगा। अगर आधा घंटा तुम मौन रह गए, तो समझ लो कि उतनी शक्ति संकल्प की बढ गई। फिर इसी तरह धीरे-धीरे बढाते रहो। संकल्प की शक्ति को विकसित करने के लिए छोटे-छोटे उपाय करो। जैसे आप सुबह नहीं उठ पाते हैं, तब रात को सोने से पहले अलार्म भर दो, फिर संकल्प  करो की मुजे  सुबह पांच बजे उठना है। घडी अलार्म बजाना भूल सकती है, पर अपने अंदर का अलार्म ठीक समय पर बज जाएगा। हम संकल्प-शक्ति का उपयोग सही तरीके से कर नहीं रहे हैं। हम कहते हे कि सुबह उठूं और हमारा मन कहता है कि आज सो जाता हूं, कल उठ जाऊंगा। संकल्प में दृढता होनी चाहिए।
 
एक संत वाणी……….

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Categories: SHRI PUSHTIDHAM HAVELI | 4 Comments

“अवतार”

“हिरणाक्ष_वाराह, हिरण्यकशिपु_नृसिंह, वामन_बलि, राम_रावण, कृष्ण_कंस,” -ॐ वाराह नृसिंह धर्म के अवतार, वामन अर्थ कै, राम काम कै, कृष्ण भक्ति कै अवतार हैं ॐ क्रमशः

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