Author Archives: Hariray Goswami

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About Hariray Goswami

I am the 17th descendent of SHRI MAHAPRABHUJI who is the founder of "SHUDDHADVAIT PUSHTIBHAKTI MARG..

श्री नृसिंह जयंती बधाई. .!!

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भक्त मनोरथ पूरक श्री नृसिंह भगवान के प्राक्टय अवतार की मंगल बधाई. .!!

जय जय श्री नरसिंह हरि !

यह जगदीश भक्त भय मोचन खंभ फारि प्रकटे करूणा करी

हिरण्यकशिपु कों नखन बिदार्यो तिलक दियो प्रहलाद अभयशिर

परमानंददास को ठाकुर नामलेत सब पाप जात जर !!

हिन्दू पंचांग के अनुसार नृसिंह जयंती का व्रत वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार इसी पावन दिवस को भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में अवतार लिया था. जिस कारणवश यह दिन भगवान नृसिंह के जयंती रूप में बड़े ही धूमधाम और हर्सोल्लास के साथ मनाया जाता है. भगवान नृसिंह जयंती की व्रत कथा इस प्रकार से है-कथानुसार अपने भाई की मृत्यु का बदला लेने के लिए राक्षसराज हिरण्यकशिपु ने कठिन तपस्या करके ब्रह्माजी व शिवजी को प्रसन्न कर उनसे अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया. वरदान प्राप्त करते ही अहंकारवश वह प्रजा पर अत्याचार करने लगा और उन्हें तरह-तरह के यातनाएं और कष्ट देने लगा. जिससे प्रजा अत्यंत दुखी रहती थी. इन्हीं दिनों हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रहलाद रखा गया. राक्षस कुल में जन्म लेने के बाद भी बचपन से ही श्री हरि भक्ति से प्रहलाद को गहरा लगाव था.हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद का मन भगवद भक्ति से हटाने के लिए कई असफल प्रयास किए, परन्तु वह सफल नहीं हो सका. एक बार उसने अपनी बहन होलिका की सहायता से उसे अग्नि में जलाने के प्रयास किया, परन्तु प्रहलाद पर भगवान की असीम कृपा होने के कारण उसे मायूसी ही हाथ लगी. अंततः एक दिन उसने प्रहलाद को तलवार से मारने का प्रयास किया, तब भगवान नृसिंह खम्भे से प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु को अपने जांघों पर लेते हुए उसके सीने को अपने नाखूनों से फाड़ दिया और अपने भक्त की रक्षा की…!!

” जो भक्तन सों बैर करत है परमेश्वर सों बैर करे “

जो जीव प्रभु के प्रिय भक्तो का द्वेष , निंदा, ईर्षा या फीर बैर करता है वह जीव प्रभु को अप्रिय है !!

केशवधृत नरहरि रूप जय जगदीश हरे श्रीनृसिंहजी के प्रागट्योत्सव “नृसिंह चतुर्दशी” की बधाई……
आज वैशाख सुदी चौदस शुक्रवार दि 24 मई 2013 नृसिंह चतुर्दशी का उत्सव हे!

श्रृँगार :- केसरिया पिछौड़ा, श्रीमस्तक पर कुलहे, मोरपंख का जोड़, कुण्डल, हीरे के आभरण, वनमाला का श्रृँगार, पिछवाई-केसरिया।
विशेषता: – आज संध्या आरती के पश्चात् श्रीनृसिंह भगवान का जन्म होता है। उस वक्त श्रीशालग्रामजी को पंचामृत स्नान कराया जाता है। ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में फूलों के आभरण और फूलों के वस्रादि के श्रृँगार होते हैं। जैसा श्रृँगार प्रातःकाल होता है वैसा ही फूल निर्मित श्रृँगार संध्या भोग आरती में भगवान को धराया जाता है। पाँच अभ्यंग होते हैं।

Hariray Goswami-Go.Hariray…!!

at London 12:20am

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Keep Moving….!!

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Akshay Tritiya Ki Mangal Badhai..!!

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AKSHAY TRITIYA..!! (Vaishak Sud Trij)
It is the day when Treta Yug was established. Chandan Yatra Starts on this auspicious day.The two month’s seva starting frm today is done by SHRI YAMAUNA MAHARANI bhav…!!

पद- सखी सुगंध जल धोरिकें चंदन धस अंग लगावैं ! निरख निरख लालन मुख हस हस मन ललचावैं ॥ चंदन अंग चित्रित किये बहुविध हुलसावे ! कृष्णदास लेपन करे मन्मथ ही लजावे ॥

Bhav-Chandan na katora ma panch vastuo ave che. Chandan, kesar, kasturi, karpur and chova teno bhav e che k chandan che te shri chandravaliji na swarup no rang che, kesar mukhya shri swaminiji na swarup no rang che, kapur anyapurva na youthadhipati, shri lalitaji na swarup no rang che. ane chova e samast bhaktona shri thakorji vishe snigdh bhav che, teno aap angikar kare che. Ane kasturi te aap shri na swarup no rang che ane shwet vastra che te atyant shital che grishma rutu ma sukhakari che tethi sngikar karya che…!!

अक्षय तृतीया की मंगल बधाई…॥
यह मंगल मय पर्व पे हम सब श्रीवल्लभ चरण अनुरागी जीवों को सेवा, संत्सग, स्मरण मे हदय को भाव “अक्षय ” रहे यही मनोभाव….॥॥॥

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Shri Vallabhacharyji Utsav Badhai..!!

Shrivallabh

at Leicester uk.

समस्त पुष्टि जीवों को जगद्गुरु श्री मद वल्लभाचार्य महाप्रभु के 536 वे प्राक्टय महा महोत्सव की मंगल बघाई हो..॥

श्री मदाचार्यमार्गोऽयं नि:साधनफलात्मक: !
तत्र तद्भावनं भावसाधनं तत्कृपाम् !!

(स्वमार्गीयसाधनरहस्यम् ग्रंथ)
આ શ્રી મદાચાર્ય વર્ય શ્રી વલ્લભાચાર્યજી નો માર્ગ કોઈ પણ સાધન વગર ના જે જીવો છે તેમના માટે જ ફલરૂપ છે.શ્રી મહાપ્રભુજી ની જેમના ઉપર કૃપા જે તેવા જીવો ને આ માર્ગ માં શ્રી મહાપ્રભુજી નું ચિંતન એ જ ભાવના સાધન રુપ છે…!!

 

बघाई गान – श्री वल्लभ मधुराकृति मेरे।
सदा बसो मन यह जीवन धन सबहिन सों जु कहत हों टेरे॥१॥

मधुर बचन अरु नयन मधुर जुग मधुर भ्रोंह अलकन की पांत।
मधुर माल अरु तिलक मधुर अति मधुर नासिका कहीय न जात॥२॥

अधर मधुर रस रूप मधुर छबि मधुर मधुर दोऊ ललित कपोल।
श्रवन मधुर कुंडल की झलकन मधुर मकर दोऊ करत कलोल॥३॥

मधुर कटक्ष कृपा रस पूरन मधुर मनोहर बचन विलास।
मधुर उगार देत दासन कों मधुर बिराजत मुख मृदु हास॥४॥

मधुर कंठ आभूषन भूषित मधुर उरस्थल रूप समाज।
अति विलास जानु अवलंबित मधुर बाहु परिरंभन काज॥५॥

मधुर उदर कटि मधुर जानु जुग मधुर चरन गति सब सुख रास।
मधुर चरन की रेनु निरंतर जनम जनम मांगत ‘हरिदास’ ॥

Granthas- Madhurashtakam, Shri Subodhini, Tatwarthdip nibandh, Anubhashya, Shree Krushna Janmapatrika, PurushottamSahastranaam,Shree Yamunashtakam, Balbodh, Siddhant Muktavali, Pushti Pravaha Maryada, Siddhant Rahasyam, Navratnam, Antahkaranprabhodh, Vivekdhairyashraya,Krushnashraya, Chatuhshloki, Bhakti Vardhini, Shree Bhagwat Ekadash Skandharth Nirupan Karika, Vachnamrut, Shikshapatra, Vallabhakhyan, Purshottam Sahasranama, Janamangal Namavali etc;

Siddhant- The word Shhudhadvaita is made up of Shhudh and Advaita.Shhudh means pure and Advaita means one.Shri Vallabh teaches that jiva is a part of Parabrahman.Parabrahman and jiva are one.There exists Advaita between the two.This Advaita is pure,natural and everlasting so it is called Shhudh.

Pragtya- Shri Vallabh was born in the year 1478 A.D.(Vik.Sam.1535) in Champaranya near Raipur in Central India.

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