राधाष्टमी उत्सव की खूब खूब बधाई हो…!!

कृपयति यदि राधा बाधिताशेषबाधा किमपरमवशिष्टं पुष्टि मर्यादयोर्मे।(विज्ञप्ती)

श्री राधाजी परमानन्द रूप है ।परमेश्वरी है ।परम कल्यान रूप है ।मुख्य स्वामिनी है ,सो श्री कृष्ण के तेज सु प्रगट भई है ।

श्री राधा शब्द की व्युत्पति सामवेद में निरूपण की है ” र ” कार है सो कोटीक जन्म के पाप कु और शुभाशुभ कर्त कु दूर करे है ।और ” अ ” कार मृत्य भय और रोग कु दूर करे है ।और ” ध ” कार है सो आयूष की हानि कु और ” अ ” कार सो भव् के बंधन कु दूर करे है और जन्म मरण आदि पीड़ा को हरे है ।

श्री राधा शब्द के श्रवण,स्मरण और उच्चारन से जीवन के सर्व पाप नाश नाश करे है यामे कोई संशय नहीं है ।दुसरो एक और भाव राधा शब्द को है ” र ” कार सो श्री कृष्ण प्रभु के चरण कमल में निश्चय भक्ति और दास भाव को देय है ,और ” अ ” कार है सो सबन कु इच्छित एसो यह ईश्वर सम्बन्धी अनन्त सुख देत है और सर्व सिद्धी के इच्छित एसो सर्वोत्तम एश्वर्य कु देत है ” ध ” कार सो वे ईश्वर के साथ सहवास कु देत है और जो ” अ ” कार है सो पुष्टि सारुप्य आदि मुक्ति देत है और हरी सरीखे तत्व ज्ञान कु देत है ।

आपका गो.हरिराय…!!
(कड़ी-अहमदाबाद-सूरत-मुंबई)

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