गुरु पूर्णिमा ” व्यास पूर्णिमा ” की मंगल बधाई….!!

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श्री गुरुचरण कमलेभ्यो मनसा स्मरामि !
श्री गुरुचरण कमलेभ्यो वचसा वदामि !!
श्री गुरुचरण कमलेभ्यो शिरसा नमामि !
श्री गुरुचरण कमलेभ्यो  शरणम प्रपद्ये !!

ध्यान मूलं गुरु मूर्ति , पूजा मूलं गुरु पदम् ।
मन्त्र मूलं गुरु :वाक्यं , मोक्ष मूलं गुरु कृपा ।।

मार्गनिष्ठा न स्वबोधै: किं तु ताद्रग्गुरुदितै: !
गरुदितानि वाक्यानि न स्वतो ह्यनुवाद त: !!

(शिक्षापत्र-9/27)

भावार्थ – गुरु के दिव्य बोध बिना पुष्टिमार्ग में निष्ठा द्रढ़ नही होती , गुरु प्रसन्न होकर जब धर्म बोध कराते है, तब हमारे ह्रदय में भाव प्रगट होता है ! गुरु के वचनों में द्रढ़ विश्वास रखना चाहिए ! गुरु के वचनों का कभीभी स्वबुद्धि द्वारा मनकल्पित एवं काल्पनिक अनुवाद नहीं करना चाहिए..!!

पुष्टि जिवो को सदा श्री आचार्यजी के चरणकमल का द्रढ़ आश्रय  अपेक्षित है !!

!! हरि सुमरै सो बार है, गुरु सुमरै सो पार !!

एक बात ध्यान में रखो…
गुरु को खोजने की आवश्यता नहीं बस केवल शिष्य बन जाव,दास बन जाव गुरु अपने आप मिलेंगे…!!

जेसे परिक्षित को मिले श्री शुकदेवजी !!
जेसे दमलाजी को मिले श्री आचार्यजी !!
जो हमारे जीवन में ज्ञान- प्रकाश-आनंद भरदे वहि तो गुरु है !!

!! श्री पितृचरण कमलेभ्यो नम: !!

गो.हरिराय..!!

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