My Posts

Spiritual Usa Tour 2014

image

Posted from WordPress for Android

Categories: My Posts | Leave a comment

I Vote..Do You ?

image

Posted from WordPress for Android

Categories: My Posts | Leave a comment

कामदा एकादशी व्रत…!!

image

शुक्रवार 11/4//2014  चैत्र शुक्ल कामदा एकादशी व्रत:

वराह पुराण अनुसार धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष इन चारो पुरुषार्थ की इच्छा (काम) को देनेवाली है। 
आज ही के दिन प्रभु ने श्री लक्ष्मण भट्टजी को वरदान दिया था की अब 100 सोमयाग पूर्ण होने के कारण स्वयं प्रभु उनके पुत्र रूप से प्रकट होंगे।  इसीलिए आज से श्री महाप्रभुजी के प्राकट्य उत्सव की बधाई शुरू होती है।हम पुष्टिमार्गीय  जीवो के लिए यह सब से बड़ी कामना प्रभु ने पूर्ण की है कि आप स्वयं श्री आचार्यचरण के रूप में प्रकट हुए और इस कलियुग में हम निस्साधन जीवो का उद्धार कर, हमें  श्रेष्ठ फल भक्ति का दान किया। पुष्टि जीवो के चारो पुरुषार्थ भक्ति ही है।  पुष्टिमार्ग में भगवान का दास होना ही धर्म है, स्वयं हरि ही अर्थ है, सर्व इन्द्रियों से प्रभु के अनुभव की इच्छा ही काम है, सम्पूर्ण रूप से प्रभु श्री कृष्ण का बन जाना ही मोक्ष है।  पुष्टि जीव के लिए इस भक्ति की इच्छा / काम को देनेवाली यह एकादशी है कामदा एकादशी….!!

Posted from WordPress for Android

Categories: My Posts | 1 Comment

विचार मंथन….!!

आओ आत्म दर्शन करे…!!

मनुष्य की प्रवृति दो प्रकार की होती है , एक दैवी और दूसरी आसुरी ! इन्हीको भगवत गीता में क्रमश: दैवी संपद और आसुरी संपद कहा गया है…..!!

* दैवी संपदवाले मनुष्य के लक्षण ये होते है, ध्यान से पढ़े…!!

अभय , चित्त की पवित्रता , ज्ञानयोग में तत्परता , सात्विक दान , इंद्रियों का संयम , निष्काम भावना से भगवदभक्ति , सत्संगी , कष्ट सहिष्णुता , शांत ,सरल स्वभाव , अहिंसा , सत्य , अक्रोध , सांसारिक वस्तु ओ में आसक्ति का ना होना , दुसरे की निंदा न करना , दया , विषयों के लिए लोलुप ना होना , मृदुभाव , बुरे काम करने में लज्जा , चंचलता का ना होंना , तेज , क्षमा , धैर्य , पवित्रता , अद्रोह और दूरभिमान से बचना…!!

आसुरी संपदवाले मनुष्य के लक्षण ये होते है…!!

पाखंड , धमंड , अति अभिमान , क्रोध , कठोरता और अज्ञान….!!

प्रिय वैष्णव जनों…!!

यह विचार मंथन हम सब के लिए आत्म चिंतन का विषय है….!!

हमारे पास कोनसी संपदा है ?
दैवी के आसुरी यह निर्णय हम खुद लेवे…!!

भौतिक संपदा के लिए तो संपूर्ण समाज चिंतित है , लेकिन इसके साथ साथ अध्यात्मिक एवं आधिदैविक संपदा के लिए सत्तत चिंतनशील रहेना हम ” पुष्टि जीवों ” का परम धर्म है…!!

© गो.हरिराय…!!
(कड़ी-अहमदाबाद- सूरत-मुंबई)

Categories: My Posts | Leave a comment

Create a free website or blog at WordPress.com.