Author Archives: Hariray Goswami

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About Hariray Goswami

I am the 17th descendent of SHRI MAHAPRABHUJI who is the founder of "SHUDDHADVAIT PUSHTIBHAKTI MARG..

मंगल बधाई…!! अधिकमास 2015

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डंडा चोथ (गणेश चतुर्थी) की मंगल बधाई…!!

पुष्टिमार्ग मे गणेशचतुर्थी:-

पुष्टिमार्ग मे “श्रीजमुनाजी” प्रथम पूज्या है…!!

जैसे मर्यादामे गणपति रिद्धि-सिद्धि, बुद्धि के दाता है और सबसे पहेले पूजनीय है वैसे पुष्टिमे श्रीजमुनाजी भाग्य-शौभाग्य और सकल सिद्धि के दाता है और श्रीमहाप्रभुजी ने सबसू पहेले उनको वंदन कियो है…!!

नमामि यमुनामहं सकल सिद्धिहेतुम मुदा

अब गणेशचतुर्थी का भाव सोचे तो यही आवे है की ” गण ” माने यूथ ” ऐश ” माने अधिपति और चतुर्थ मतलब जो चतुर्थ यूथ के अधिपति है (श्री जमुनाजी) उनको उत्सव और दूसरो भाव ये के जो चारोयूथ के अधिपति हे (श्री ठाकुरजी) उनको उत्सव…!!

वैष्णव को बुद्धि की प्रेरणा देने वाले श्रीप्रभु के चरनार्विंद हे

बुद्धि प्रेरकम श्रीकृष्णस्य पादपद्मं

ताते गणेशचतुर्थी मे श्रीयमुनाजी श्रीठाकोरजी श्री महाप्रभुजी का ही आराधन करे..!!

श्रीयमुनाष्टक के पाठ करे और “अन्याश्रय ” से बचे और प्रभुके कृपापात्र बने…!!

आपका गो.हरिराय..!!
(कड़ी-अहमदाबाद-सूरत-मुंबई)

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जन्माष्टमी महामहोत्सव की मंगल बधाई…!!

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विचार मंथन…!!

गीता ज्ञान मंथन..!!

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति ।
तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥

(आत्मसंयमयोगो नाम षष्ठोऽध्यायः)

भावार्थ :  जो पुरुष सम्पूर्ण भूतों में सबके आत्मरूप मुझ वासुदेव को ही व्यापक देखता है और सम्पूर्ण भूतों को मुझ वासुदेव के अन्तर्गत देखता है, उसके लिए मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिए अदृश्य नहीं होता..!!

जन्माष्टमी महामहोत्सव की मंगल बधाई…!!

श्री कृष्ण हम सब को प्रिय है आओ अब हम श्री कृष्ण के प्रिय बन जाय…!! यही वैष्णवी जीवन का परम फल है..!!

हमारे मन में कृष्ण , हमारी वाणी में कृष्ण , हमारे विचारों में कृष्ण हो और हमारे क्षण क्षण में और रोम रोम में  श्री कृष्ण बस जाय…!!

जो हमारे ह्रदय में कृष्ण होंगे तो वह हमारी वाणी एवं हमारे नेत्रों(द्रष्टि) द्वारा अवश्य प्रगट होंगे और उसके फल स्वरुप हम अच्छा और मधुर बोलेंगे और अच्छा देखेंगे..!! हमारी दोषबुद्धि का नाश होगा..!!
फिर सर्व जगत कृष्णमय द्रश्य होगा..!!

!! जय श्री कृष्ण !!

आपका गो.हरिराय..!!
(कड़ी-अहमदाबाद-सूरत-मुंबई)

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गुरु पूर्णिमा ” व्यास पूर्णिमा ” की मंगल बधाई….!!

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श्री गुरुचरण कमलेभ्यो मनसा स्मरामि !
श्री गुरुचरण कमलेभ्यो वचसा वदामि !!
श्री गुरुचरण कमलेभ्यो शिरसा नमामि !
श्री गुरुचरण कमलेभ्यो  शरणम प्रपद्ये !!

ध्यान मूलं गुरु मूर्ति , पूजा मूलं गुरु पदम् ।
मन्त्र मूलं गुरु :वाक्यं , मोक्ष मूलं गुरु कृपा ।।

मार्गनिष्ठा न स्वबोधै: किं तु ताद्रग्गुरुदितै: !
गरुदितानि वाक्यानि न स्वतो ह्यनुवाद त: !!

(शिक्षापत्र-9/27)

भावार्थ – गुरु के दिव्य बोध बिना पुष्टिमार्ग में निष्ठा द्रढ़ नही होती , गुरु प्रसन्न होकर जब धर्म बोध कराते है, तब हमारे ह्रदय में भाव प्रगट होता है ! गुरु के वचनों में द्रढ़ विश्वास रखना चाहिए ! गुरु के वचनों का कभीभी स्वबुद्धि द्वारा मनकल्पित एवं काल्पनिक अनुवाद नहीं करना चाहिए..!!

पुष्टि जिवो को सदा श्री आचार्यजी के चरणकमल का द्रढ़ आश्रय  अपेक्षित है !!

!! हरि सुमरै सो बार है, गुरु सुमरै सो पार !!

एक बात ध्यान में रखो…
गुरु को खोजने की आवश्यता नहीं बस केवल शिष्य बन जाव,दास बन जाव गुरु अपने आप मिलेंगे…!!

जेसे परिक्षित को मिले श्री शुकदेवजी !!
जेसे दमलाजी को मिले श्री आचार्यजी !!
जो हमारे जीवन में ज्ञान- प्रकाश-आनंद भरदे वहि तो गुरु है !!

!! श्री पितृचरण कमलेभ्यो नम: !!

गो.हरिराय..!!

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