विचार मंथन..!!

” जय श्री कृष्ण ”

प्राय: ” जय श्री कृष्ण ” अभिवादन के संदर्भ में कह्यो जाय है, लेकिन यह कहेवे को तात्पर्य समजनो परम आवश्यक है..!!
ले
किन आजकल ” जय श्री कृष्ण ” केवल व्यवहारिक हो गया है..
जेसे Hi / Hello का प्रयोग लोकीक में करते है  ऐसे पुष्टि जिव को ” जय श्री कृष्ण ” बोलना है ऐसी विचार धारा है..!! 

और अब तो शोर्ट फॉर्म में ” JSK ” प्रचिलित  हो रहा है..!! एसा लिखना ,पढना ,बोलना और सुनना भी हम पुष्टि जीवों के लिये उचित नहीं , जाने अनजाने में कही ना कही हम दोष के भागी बने है..!!

“जय श्री कृष्ण ”
हमारे शुध्ध ह्रदय को दिनता भाव प्रगट करे है…!!

जेसे जय और पराजय शब्द है…!!

जिव सदा प्रभु को जय चाहे है तब
यहा जिव अपनो दास भाव संग
पराजय स्वीकार कर रह्यो है और प्रभु को जय घोष कर रह्यो है…!

जिव में रह्यो अज्ञान , अहम ,आग्रह ,नष्ट होवे तब वो पराजय भयो समजनो..

ईन भावन कुं विचार कर केवल ओपचारिक अभिवादन न करके सह्रदय हम हमारे “श्री कृष्ण ” को जय धोष करे यही पुष्टि भाव जाननो..!!

© गो.हरिराय..!!! 

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2 thoughts on “विचार मंथन..!!

  1. Nishant M Mavani

    Dandvat Pranam J J…. Thank you for sharing the meaning in such a beautiful way… Nowadays, all use JSK… But we will try to pass on this message to as many as possible.. Dandvat Pranam

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